बुधवार, 16 मार्च 2016

भारत माता की जय

            भारत भूष्‍ण अरोरा
पुत्री हंता पुत्र मांगते, दहेज लोभीे कन्यादानी समाज की क्षय,
बलात्कारियों का मजहब देखकर न्याय करती दुनियांें की क्षय
                                 भारत माता की जय
दलित हंता पहन के चोला बन गये संता की क्षय,
 गरीबों का पी के खून रेडीमेड नेताओं की क्षय
                             भारत माता की जय
गरीबी को आदमी का मुकददर बताती मान्यताओं की क्षय,
धरती छोड स्वर्ग में कोठियां बांटते प्रवचनवीरों की क्षय
                               भारत माता की जय
जबरन मंूछे मुंडवाते, चोटी रखवाते इन्सानियत खोरों की क्षय,
सिर की इज्जत टोपियों में फिरकेवाना रंग भरते रंगसाजों की क्षय
                                  भारत माता की जय
भोजन को हलाल और झटका में बांटते रोटीखोरांे की क्षय
तन के कपडे को लुंगी और तहमद बताते बाजारवादियों की क्षय,
                                भारत माता की जय
राशनचोरों मिलावटखोरों के हाथ में तिरंगा थमाने वालों की क्षय,
तिरंगे को अपराधियों का लाइसेसी हथियार बनाने वालो की क्षय,
                                 भारत माता की जय
                                 भारत माता की जय

 

सोमवार, 7 मार्च 2016

जय ततैया लाल की

 जय ततैया लाल की
भारत भूषण अरोरा
खोदी  सर आज जब क्लास में आए तो उनकी नाक किसी ततैयां के काटने के कारण सूजी हुई थी। बच्चे उनको देखकर खिलखिला कर हस पडे इस पर खोदी सर ने उनको डांट लगाते हुए कहा एक प्राचार्य का ऐसा मजाक बनाना भारतीय संस्कृति व अभिव्यक्ति की आजादी  का अपमान है।बच्चे उनकी यह बात सुनकर सहम गये। खोदी सर ने अपना प्रवचन चालू रखते हुूए कहा तुम्हे पता नहीं दिल्ली के एक विदेशी संस्कृति वाले स्कूल में बहुत सारे मच्छर पैदा हो गये थे
रात को जब मैं सो रहा था तो उसी स्कूल के कुछ मच्छर मेरे कमरे मैं भिनभिना कर मेरी नींद खराब कर रहे थे। मेरे गृहसंतरी से रहा नहीं गया उन्होने मच्छरों को मारने के बजाए जेल में डाल दिया। जेल से आते ही ये मच्छर ततैयां के अवतार में बदल गया। आज सुबह देशसेवा के काम में लगा ही था कि इसी ततैयां ने आकर मेरी नाक पर काट खाया तभी से अपने जख्मों को सहला रहा हूं।
एक बच्चे ने सोचा प्राचार्य भक्ति दिखाने का यही मौका है उसने कहा सर मैं उसकी जीभ काट लाउंगा, दूसरे ने कहा सर मै उसका सिर आपके चरणों में लाकर रख दूंगा। बच्चों के मुख से प्रचार्यभक्ति की बात सुनकर खोदी सर मंद मंद मुस्करा करने सोचने लगे यही है सच्ची देशभक्ति पर बोले कुछ नही। क्लास का तनाव हल्का होते ही बच्चों ने कहा सर अब तो हस दीजिए प्लीज अब हमें पढाना शुरू कीजिए।
 खोदी सर का मूड ठीक हुआ तो उन्होने कहा बडे होकर तुम कालाधन कमाना चाहोगे या सफेदधन? बच्चों ने कहा सर इनमें से कोई भी नहीं केवल संतोषधन कमाना चाहेंगे। खोदी सर ने दूसरा सवाल दागते हुए कहा बच्चों बडे होकर राजनीति करोगे या धर्मकर्म? बच्चों ने कहा सर दोनों का काकटेल बनाकर पी जाऐंगे उपर से धार्मिक होंगे अन्दर से घाघ राजनीतिज्ञ। खोदी सर ने फिर पूछा मां की बात माननी चाहिए या बाप की? बच्चों ने कहा सर बाप की वही तो रोटी कमाकर खिलाता है। मां का क्या वो तो खुद ही हमारे राजा बाप की गुलाम होती है राजा ही भगवान का अवतार होता है। बच्चों के उत्तर सुनकर खोदी सर का सीना गर्व से फूलने लगा उन्होने फिर पूछा ये बताओ तुम्हे विकास चाहिए या विनाश? बच्चों ने एक स्वर में कहा विकास। खोदी सर ने फिर पूछा विकास की गाडी में रूकावट कौन पैदा कर रहा है? बच्चों ने कहा सर, सवा सौ करोड देशवासियों में से बीस-पचीस करोड बुन्दु हैं जो रहते तो हमारे तालाब में है परन्तु पानी पडौसी दुश्मनों के तालाब में पीने जाते है। खोदी सर ने कहा तुम्हारे बाकी सारे उत्तर सही थे पर ये उत्तर समझने में सही है लेकिन बोलने में गलत समझे कुछ। बच्चों ने कहा यस सर।
खोदी सर ने फिर पूछा बच्चों तुम्हे शिक्षा सस्ती चाहिए या महंगी? बच्चों ने कहा सर महंगी, क्योंकि सस्ते स्कूलों में तो मच्छर पैदा होते हैं जो पूर देश में मलेरिया फैला सकते हैं महंगे स्कूल अच्छे होते है जहां मच्छर नहीं बल्कि मकडियां पैदा होती जो अपने जाल में फंसाकर सारे मच्छरों को जकड कर मार डालती हैं। ना सस्ते स्कूल होंगे ना मच्छर पैदा होंगे, ना रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी। खोदी सर बच्चों के उत्तर सुनकर अतिउत्साहित होते हुए बोले तुम्हे आजादी चाहिए या गुलामी? बच्चों ने कहा सर, दोनों। खोदी सर ने कहा अपना मंतव्य स्पष्ट करो, बच्चों ने कहा सर, जो मच्छरवाद से आजादी, जो बुन्दुवाद से आजादी, जो पंजावाद से आजादी, जो गंजावाद से आजादी। हम भी मकडवाद की गुलामी।
खोदी सर अब क्लास में अपनी पूरी लय में आ गये थे सोचा ऐसे देशभक्त बच्चे ही आगे चलकर देश की कमान संभालेंगे तो देश पर दोबारा से अंग्रेजों का राज नहीं हो सकता। उन्होने बच्चों में उग्र देशभक्ति का जज्बा परखने के लिए आखिरी सवाल पूछते हुए कहा कि आतंकवाद की परिभाषा बताते हुए एक सुंदर सा छंद सुनाओ। बच्चों ने एक स्वर में कहा
 माना कि हर बुन्दु, आतंकी नहीं होता।
पर हर आतंकी, बुन्दु ही क्यों होता है।।
खोदी सर बच्चों का देशभक्ति से भरा यह छंद सुनकर गदगद हो गये वो बच्चों को मूहमांगा ईनाम और आर्शीवाद देकर जाने वाले ही थे कि जिस ततैयें ने कल रात उनकी नाक पर काटा था वह फिर से क्लास में प्रकट हो गया। ततैयें को देखकर खोदी सर ने कहा मारो मारो कहीं मेरे साथ तुम्हे भी डंक न मार दे। ततैयेें ने कहा मुझे मारो मत बस मेरी गुनगुन अपने कान में सुन लो। खोदी सर ने कहा ठीक है काटना मत सुनाओ ततैयां ने कहा
माना कि हर संघी,  बुन्दुओं से नफरत नहीं करता
पर हर बुन्दु से नफरत करने वाला संघी ही क्यों होता है।।

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

वाह इमरती,जलेबियों को धो डाला

वाह इमरती,जलेबियों को धो डाला
भारत भूषण अरोरा
इमरती ने आज कमाल कर दिया धोबी के घाट पर नवरसों का इस्तेमाल करते हुए जलेबियों की ऐसी धुलाई कर डाली की देश की तमाम जलेबियों का तेल निकल गया। इमरती ने जब करूणरस का इस्तेमाल करते हुए कहा कि स्कूलों के भगवाकरण का आरोप सिद्व हुआ तो राजनीति से सन्यास ले लूंगी। भला इस आरोप पर इतनी करूणा की क्या जरूरत थी इमरती और जलेबियों का प्राकृतिक रंग ही भगवा है तो फिर आरोप कैसा ये तो वो बात हुई कि मुझ पर गिरगिटों के रंग बदलने की आदत को बदलने का आरोप लगाया जा  रहा है।
इमरती ने रौद्ररस का प्रयोग करते हुए जलेबियों से कहा कि सुनो जलेबियों तुम्हारे पत्रों को दिखाती हूं जिसमें आप बेवजह की सिफारिशें कर रहे हैं मैने आपका सम्मान करते हुए आपके काम किये।जलेबियां उनके इस वार को बर्दाश्त नहीं कर र्पाईं। जलेबियों ने कहा ये तो धोखा है। जब हम सरकार में थे तो हमने इमरतियों की सिफारिशों को भी सिरमाथे पर रखा है अगर आपको ये पोल खोलनी थी तो हम भी आपके पत्रों को लेकर आते।
इस पर इमरती ने हास्यरस में जलेबियों को डुबाते हुए कहा सुनों सारे स्कूलों के लंगूर तुम्हारे ही रखे हुए है वे ही बदमाशी कर  रहे है। हम तो बस उनसे बंदर भगाने का काम ले रहे है जो वे पहले नहीं कर रहे थे। अब आप ही बताओं लंगूर को खाली बैठने की तन्खवाह क्यों दें ये तो राष्टृीय आय की बर्बादी होगी। लंगूरों से काम तो लेना ही पडेगा। इस पर जलेबियों ने कहा सुन इमरती माई लंगूरों को हमने तैनात किया या तुमने वे तो उसी की मानते हैं जिसका रोटी खाते हैं आप उनका अपमान नहीं कर सकते वे तो नौकर धर्म का पालन कर रहे है। पहले वे भगवा बंदर भगाते थे अब लाल बंदरों को खदेड रहे हैं वे अपना काम कर रहे है उन्हे शांतिपूर्वक अपना काम करने दीजिए इमरती मैडम इस पर राजनीति न करें।
इमरती ने वात्सल्यरस मेें डूबते हुए नीली जलेबी से कहा कि वे बच्चे की मौत पर राजनीति न करें। इमरती व जलेबियों की कोई जाति नहीं होती वे तो बस मूंह में राम बगल की मीठी छुरी होती है। बिना कसरत किये खाई जाए तो शुगर की बीमारी पैदा करती है। इमरती ने रौद्ररस में ंिचंघाडते हुए कहा अगर आप मेरे जवाब से संतुष्ट नही ंतो मेरा सिर कटवा देना। इमरती ने एकदम भक्तिरस में यूटर्न लेते हुए कहा मैं तो राष्टृ और उसके मालिक की सेवा में रत हूं। ऐ री मै तो प्रेमदीवानी मेरा दर्द न जाने कोए।
इस पर नीली जलेबी ने कहा आप पर जलेबियों के भगवाकरण का आरोप नहीं लगा रही हूं मै तो बस इतना चाहती हूं कि गांव के मेलों में नीली जलेबियों की व्यस्था को अनिवार्य कर दिया जाए। क्योंकि पिछली बार मेरा हाथी भगवा जलेबियों का स्वाद चख चुका कहीं ऐसा न हो कि ये उसकी आदत बन जाए। नीली जलेबी की देखादेखी लंबी नाक वाली जलेबी ने भी मांग कर डाली कि अगर आप हरी जलेबियों का भी इंतजाम कर दे ंतो आप आराम से सरकार में बनी रह सकती है। तिरंगी जलेबियां भी कहां पीछे रहने वाली थी बोली इमरती बहन तुम हमारे तिरंगेपन की वजह से सत्ता में आई हो बस इतना अहसान कर दो कि मेले के मैन्यू में तिरंगी जलेबी भी स्वाद के लिए रहे तो अच्छा रहेगा।
इस पर इमरती ने वीभत्सरूप में कहा शांति से सुनों रंगबिरंगी जलेबियों गत साठ वर्षों से तुम्हारी ही चल रही थी इमरती और जलेबी भगवा ही रहेगी रहना है तो रहो वरना जाओ पडौसी के यहां। फिलहाल तो मुझे लाल जलेबियों से निबटना है। गांव के मेले में दो ही रंग की इमरती और जलेबियां बिकती है भगवा और लाल बस फर्क ये है कि भगवा इमरतीं बडे लोगों की पसन्द है और लाल जलेबियां आम आदमी खाता है। प्राकृतिक मुकाबला भगवा इमरती और लाल जलेबियों में ही है चलो हटो मैदान से वास्तविक मुकाबला होने दो।
शाबाश इमरती जलेबियों की ऐसी धुलाई पहले कभी नहीं देखी कि इनका तो रस ही निचुड गया। ऐसी धुलाई देखकर सुुषमा  बहन भी शर्मा गयीं होगी। बक्कड की बधाई स्वीकार करों।

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

अाम चुनाव 2014 पर एक लेख जो आज भी प्रसांगिक है

आम चुनाव 2014 को छपा मेरा लेख जो दैनिक प्रभात में प्रथ्‍म पेज पर छपा था जो आज भी प्रसांगिक है और जब तक मोदी सरकार रहेगी प्रसांगिक  रहेगा
  भारत भूषण अरोरा

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

आम चुनाव 2014 पर धारवाहिक वयंगय

आम चुनाव 2014 पर धारावाहिक वयंगय जो दैनिक प्रभात में 10 अप्रैल 14 को प्रकाश्ति हुआ था
 भारत भूषण अरोरा